ज्वेलर जतिन सोनी की गोली मारकर हत्या करने वाले बदमाशों तक पहुंचने के लिए झुंझुनूं पुलिस को हरियाणा और गुजरात तक गई। दोनों बार पहले ही भनक लगने से आरोपी भाग निकले। हरियाणा में पुलिस ऐसे मकान तक पहुंची, जहां आरोपी छिपे थे। करीब 20 फीट ऊंची दीवारें, चारों तरफ कैमरे और तारों में दौड़ता करंट था। पुलिस ने कई दिन तक आरोपियों के लौटने का इंतजार किया। जाल बिछाकर शूटर को बुलाया और आते ही दबोच लिया।
दूसरी ओर गुजरात से बीकानेर में गर्लफ्रेंड मिलने पहुंचे योगेश चारणवासी को गिरफ्तार किया गया। शुरुआत में पुलिस के पास आरोपियों तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक आईडी कार्ड था। इसी एक सुराग से कड़ियां जुड़ती गईं। छह साल से ज्यादा चली इस जांच के बाद 30 सितंबर 2026 को अदालत ने पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

पहले समझे… क्या था पूरा मामला
15 सितंबर 2019 को दोपहर करीब 2:37 बजे वारदात हुई। माननगर स्थित स्काईलाइन हॉस्पिटल के पास न्यू प्रकाश ज्वेलर्स पर बाइक और सफेद बोलेरो से हथियारबंद बदमाश पहुंचे। उस समय शोरूम में ज्वेलर संदीप सोनी के भाई बाईसराम उर्फ जतिन सोनी और कर्मचारी नवीन मौजूद थे।
बदमाशों ने दोनों पर पिस्टल तान दी और ज्वेलरी बैग में भरने के लिए कहा। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। बदमाशों ने जतिन के गले में पहनी चेन भी उतरवा ली। बदमाश जब ज्वेलरी समेट रहे थे, उसी दौरान जतिन ने मौका देखकर दुकान का शीशा खोला और बाहर की तरफ भागे। बदमाशों ने उनका पीछा किया और सड़क पर ही उन पर गोली मार दी। जतिन गंभीर घायल होकर गिर पड़े।
गोली मारने के बाद बदमाश शोरूम से लाखों रुपए की ज्लेवरी लूटकर बाइक और बोलेरो से फरार हो गए। गंभीर घायल जतिन को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। 25 दिन बाद 9 अक्टूबर 2019 को जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई।

मामले के जांच अधिकारी सिटी डीएसपी गोपाल सिंह ढाका ने बताया- वारदात के बाद हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि आखिर बदमाश कौन थे और कहां गए? सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे, लेकिन फुटेज में योगेश चारणवासी के अलावा दूसरे आरोपियों की पहचान नहीं हो पा रही थी। जिस वाहन से बदमाश आए और फरार हुए, उसका भी ऐसा कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला, जिससे हम सीधे आरोपियों तक पहुंच सकें। बदमाश मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी नहीं कर रहे थे। वारदात के दौरान ज्वेलर जतिन सोनी को दिया गया योगेश का आईडी कार्ड था एक मात्र सुराग था। जो झुंझुनूं के चारणवासी गांव का रहने वाला है।
योगेश फरार था, पुलिस पर भी बढ़ रहा था दबाव
सिटी डीएसपी गोपाल सिंह ढाका ने बताया- वारदात के बाद योगेश फरार था और पुलिस को उसकी तलाश थी। घटना को लेकर शहर में आक्रोश था। दिसंबर 2019 तक मुख्य आरोपी योगेश के फरार रहने को लेकर पुलिस पर दबाव था। इसी दौरान हमें पता चला कि वारदात से पहले कुछ संदिग्ध लोग मुकुंदगढ़ (झुंझुनूं) के एक होटल में ठहरे थे। होटल संचालक से पूछताछ में मुख्य शूटर दीपक पहल के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद दीपक का मोबाइल हमारे हाथ लगा।
हरियाणा पहुंचे तो मिला हाई सिक्योरिटी ठिकाना
सिटी डीएसपी गोपाल सिंह ढाका ने बताया- शूटर दीपक की तलाश में टीम हरियाणा पहुंची। जांच करते-करते हम ऐसे मकान तक पहुंचे, जहां वारदात के बाद आरोपी छिपे थे। मकान के चारों तरफ करीब 20 फीट ऊंची दीवारें थीं। दीवारों पर तारों की फेंसिंग और बिजली का करंट था। दीवारों और परिसर में कैमरे भी लगे हुए थे। पूरा परिसर ऐसा था कि बाहर से अंदर जाना आसान नहीं था। लेकिन जब हम वहां पहुंचे तो आरोपी वहां से निकल चुके थे।

आरोपी के लौटने के इंतजार में कई दिन तक वहीं डटे रहे
सिटी डीएसपी ने बताया- हमने वह ठिकाना छोड़ा नहीं। चार जवानों को वहीं निगरानी के लिए छोड़ दिया। तीन दिन बाद पता चला कि हाई सिक्योरिटी ठिकाना शूटर दीपक के चचेरे भाई का है। आरोपी के भाई को कस्टडी में लेकर शूटर को भरोसा दिलाया। मैसेज पहुंचाया कि पुलिस को उसके बारे में पता चल सकता है और उसको कभी मार सकते हैं। ठिकाने पर वापस लौट आओंगे तो सुरक्षित रहोगे।
कई दिन इंतजार के बाद दीपक उसी ठिकाने पर पकड़ा गया
कुछ दिन की कोशिश के बाद दीपक वहां पहुंचा और हमने उसे पकड़ लिया। दीपक की गिरफ्तारी के बाद जांच को सबसे महत्वपूर्ण जानकारी मिली। पूछताछ में विनोद कुमार का नाम सामने आया। उस समय वह भी फरारी काट रहा था। जांच में यह सामने आया कि योगेश और दीपक पहले से एक-दूसरे को जानते थे और विनोद की पहचान भी दीपक से थी। साजिश में योगेश और दीपक की भूमिका थी और विनोद को भी इसमें शामिल किया गया था।

एक-एक कड़ी जुड़ती गई और पूरी टीम सामने आने लगी
सिटी डीएसपी ने बताया- दीपक से मिली जानकारी के बाद जांच आगे बढ़ी तो मुकुंदगढ़ की होटल वाली कड़ी से हम प्रताप सिंह तक पहुंच चुके थे। वाहन उपलब्ध कराने वाले अंकित कुमार उर्फ मीठू की भूमिका भी जांच में सामने आई।
लेकिन इस पूरी जांच में सबसे बड़ा आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर था। जिस आरोपी योगेश चारणवासी का पहचान पत्र सबसे पहले हमारे हाथ लगा था, वही हमारी पकड़ से बाहर था।
वापी में एक दिन देर हुई, लेकिन सुराग बीकानेर तक पहुंचा गया
जांच के दौरान योगेश गुजरात के वापी में छिपे होने की जानकारी मिली। टीम वहां पहुंची, लेकिन वह एक दिन पहले वहां से निकल चुका था। जानकारी मिली कि बदमाश बीकानेर में अपनी गर्लफ्रेंड के पास जा सकता है। जल्दबाजी करने के बजाय उस घर की निगरानी की। एक रात योगेश के वहां पहुंचते ही टीम ने दबोच लिया। फरवरी 2020 में बीकानेर से गिरफ्तार कर लिया गया।
सात साल बाद अदालत का फैसला, पांच दोषियों को उम्रकैद
जांच पूरी होने के बाद मामला अदालत पहुंचा। 30 सितंबर 2026 को अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-2 कालूराम ने न्यू प्रकाश ज्वेलर्स डकैती और जतिन सोनी हत्याकांड में दीपक पहल, योगेश कुमार, विनोद कुमार, अंकित कुमार उर्फ मीठू और प्रताप सिंह को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं प्रमोद कुमार उर्फ धोलिया को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।





