उदयपुर में दो करोड़ रिश्वत मामले में गिरफ्तार SOG के एएसपी मुकेश कुमार सोनी और उसके दलाल सज्जन सिंह जैन से जुड़े कई खुलासे हुए हैं। शिकायतकर्ता (परिवादी) निरंजन मोगरा ने बताया- एएसपी और दलाल से कार में मेरी मुलाकात हुई थी। इस दौरान जाते-जाते एएसपी सोनी ने कहा था- मैं 30 सितंबर को चार्जशीट पेश कर दूंगा। इससे पहले व्यवस्था कर देना।
निरंजन मोगरा का आरोप है कि मेरे घर से सोने की घड़ी, बैंगल और डीवीआर जब्त की गई थी। एएसपी मुकेश सोनी ने इन्हें रिकॉर्ड में नहीं दर्शाया। इनकी कीमत करीब 6-7 लाख रुपए थी। जब 25 अगस्त को जमानत के बाद हम घर आए तो पता लगा कि जब्त हुई चीजें घर पर नहीं हैं।
निरंजन मोगरा ने बताया- सज्जन सिंह ने मुझे 100 प्रतिशत काम होने की गारंटी दी थी। साथ ही केस को पूरी तरह हल्का बनाने की बात कही थी।
बता दें, एसीबी उदयपुर ने दलाल सज्जन सिंह जैन को शनिवार को 2 करोड़ की रिश्वत लेते पकड़ा था। वहीं रविवार को एएसपी मुकेश कुमार सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया।

जब्त माल के लिए स्टाफ ने कहा था- एएसपी साहब बताएंगे
निरंजन मोगरा ने बताया- एसओजी के एएसपी मुकेश सोनी ने मुझे और मेरी पत्नी रिटायर्ड अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया को 4 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। तब घर से माता-पिता, बड़े भाई की जमीन के कागजात जब्त किए थे। गिरफ्तारी के दौरान घर से 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए भी जब्त किए थे।
निरंजन ने बताया- सोने की घड़ी-बैंगल और डीवीआर को जब्त करने के रिकॉर्ड में ही नहीं दिखाया। हमने स्टाफ से पूछा तो बोले- एएसपी साहब बता पाएंगे। इतना ही नहीं, एसओजी कार्यालय में जसवंत राव नाम के रीडर ने SBI के खाली चेक पर मेरी पत्नी के साइन करवा लिए थे।
दलाल ने पहले एक करोड़ मांगे, फिर 2 करोड़ की डिमांड
शिकायतकर्ता निरंजन ने बताया- जब्त गोल्ड को छुड़ाने के लिए मेरे पास दलाल सज्जन सिंह का फोन आया था। वह पहले से मुझसे परिचित था। वह बोला- एएसपी मेरे अच्छे जानकार हैं। वह जब्त सामान छुड़वा देगा और केस को भी हल्का करवा देगा। इसकी एवज में उसने एएसपी के नाम पर मुझसे 1 करोड़ रुपए मांगे थे। फिर कुछ दिन बाद बोला कि साहब ने 2 करोड़ का बोला है।
निरंजन के अनुसार, मैंने दलाल को कहा कि मैं इतने पैसे नहीं दे पाऊंगा। एक बार साहब से मिलवा दो। इसके बाद दलाल सज्जन सिंह अपनी कार में बैठाकर मुझे फतहसागर झील किनारे रानी रोड लेकर गया। जहां कुछ देर बाद प्राइवेट कार में एएसपी सोनी वहां पहुंचा। तभी सज्जन सिंह अपनी कार से उतरकर एएसपी सोनी के साथ आगे की सीट पर बैठ गया। वहीं पीछे की सीट पर मुझे बैठाया।
इसके बाद सज्जन सिंह ने डील की बात शुरू की। मैंने रिश्वत की राशि कम करने की मांग की, लेकिन एएसपी बिल्कुल चुप रहा और कुछ नहीं बोला। करीब 5 मिनट बाद एएसपी ने अपने मोबाइल स्क्रीन पर 2CR के साथ लिखा कि सज्जन सिंह बोलेगा, वही फाइनल है।

शराब से जुड़े केस में एएसपी ने की थी दलाल की मदद, तब से दोस्ती
जानकारी के अनुसार- दलाल सज्जन सिंह शराब व्यवसायी रहा है। शराब से जुड़े एक केस के सिलसिले में उसकी मुलाकात एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी से हुई थी।
उस केस में एएसपी सोनी ने सज्जन सिंह की मदद की थी। तब से दोनों की दोस्ती हो गई और अक्सर इनका मिलना-जुलना होता रहता था।
दलाल सज्जन सिंह ने परिवादी को कहा था कि साहब (एडिशनल एसपी) के बार-बार फोन आ रहे हैं। आप जल्दी करो। काम फ्री में नहीं होगा। पैसे दोगे तो तो ही काम होगा।
यह है मामला
दरअसल, साल 2012 में यूआईटी ने कई कॉलोनियां उदयपुर नगर निगम को ट्रांसफर की थीं। इनमें करोड़ों के प्लॉट खाली थे। आरोप है कि भू-माफियाओं और निगम अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से खाली जमीनों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार करवा लिए गए। फर्जी व्यक्तियों के नाम नामांतरण खोलकर उन्हें आगे महंगे दामों पर बेच दिया था।
साल 2022 में निगम 272 प्लॉट घोटाले की FIR सूरजपोल थाने में दर्ज कराई गई थी। एसओजी ने 4 अगस्त को सुखेर निवासी पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार किया था। उनके घर से 2 किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए जब्त किए थे। इसी मामले में एफआर लगाने और जब्त सामान छोड़ने के लिए रिश्वत ली गई। यह 500 करोड़ का घोटाला विधानसभा में भी उठ चुका है।
इस मुद्दे को सबसे पहले साल 2022 में कांग्रेस पार्षद रहे अजय पोरवाल ने उठाया था। जांच के बाद 48 पट्टों को निगम ने निरस्त कर दिया। इस बीच पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और वर्तमान उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने भी इस मुद्दे को कई बार उठाया था। ताराचंद जैन इसे विधानसभा में भी उठा चुके हैं। अप्रैल 2022 से एसओजी मामले की जांच कर रही है।





