18वीं मंजिल की छत पर अवैध निर्माण पर चला जेडीए का बुलडोजर

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जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के प्रवर्तन दस्ते ने जोन-10 क्षेत्र में भवन विनियमों के उल्लंघन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फेलिसिटी रूगंटाज एवेनचुरा में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। जेडीए के अनुसार 18वीं मंजिल की छत के ऊपर भवन विनियमों का उल्लंघन करते हुए निर्माण किया गया था। इसके अलावा कॉमन टेरेस को कथित तौर पर प्राइवेट टेरेस के रूप में उपयोग किया जा रहा था।

उप महानिरीक्षक पुलिस आनन्द शर्मा के अनुसार मुख्य नियंत्रक प्रवर्तन-प्रथम के निर्देशन में टीमों का गठन कर 28 सितम्बर को ग्राम टोडी रमजानीपुरा, तहसील सांगानेर स्थित फेलिसिटी रूगंटाज एवेनचुरा में कार्रवाई की गई। प्रवर्तन दस्ते ने स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए व्यावसायिक निर्माण को ध्वस्त किया।

जेडीए के मुताबिक भवन के सी-ब्लॉक की चौथी मंजिल पर सर्विस एरिया में बने फ्लैट तथा ग्राउंड स्तर के कॉमन एरिया में किए गए व्यावसायिक निर्माण को भी कार्रवाई के दायरे में लिया गया। प्रवर्तन दस्ते ने लोखंडा मशीन और मजदूरों की सहायता से चिन्हित निर्माण हटाया।

कार्रवाई के बाद बड़ा सवाल—इतना निर्माण हुआ तो निगरानी तंत्र कहां था?

जेडीए की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि निर्माण स्वीकृत मानचित्र के विपरीत था और भवन में नियमों का गंभीर उल्लंघन हुआ, तो निर्माण के दौरान संबंधित अधिकारियों और तकनीकी स्टाफ की निगरानी व्यवस्था की भूमिका क्या रही?

इतने बड़े भवन में 18वीं मंजिल की छत पर निर्माण होने और कॉमन टेरेस के उपयोग में बदलाव जैसे मामलों का पता समय रहते क्यों नहीं चला? क्या जेडीए के संबंधित जोन कार्यालय की ओर से समय-समय पर निर्माण की जांच की गई थी? यदि जांच हुई थी तो उस समय क्या रिपोर्ट तैयार की गई और यदि नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी—ये सवाल अब कार्रवाई के बाद उठ रहे हैं।

आर्किटेक्ट की भूमिका की जांच की मांग

मामले में भवन के आर्किटेक्ट की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण किस स्तर पर हुआ और क्या संबंधित आर्किटेक्ट ने निर्माण की निगरानी अथवा स्वीकृत नक्शे के अनुरूप होने का कोई प्रमाणन किया था।

यदि सक्षम जांच में आर्किटेक्ट की ओर से नियमों की अनदेखी, गलत प्रमाणन या अन्य पेशेवर अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार उसके खिलाफ कार्रवाई के साथ उसके पंजीकरण/लाइसेंस को निलंबित या निरस्त करने की कार्रवाई पर भी विचार किया जाना चाहिए।

नक्शा स्वीकृति से लेकर निर्माण की निगरानी तक जांच की जरूरत

मामला केवल अवैध निर्माण तोड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि भवन का मूल नक्शा किस आधार पर स्वीकृत हुआ, निर्माण के दौरान निरीक्षण किस अधिकारी या तकनीकी टीम ने किया, कॉमन एरिया में बदलाव कब और कैसे हुआ तथा अवैध निर्माण की जानकारी जेडीए को कब मिली।

यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारी, तकनीकी स्टाफ अथवा अन्य जिम्मेदार पक्ष के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे भविष्य में बड़े आवासीय एवं व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स में स्वीकृत मानचित्र से छेड़छाड़ पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

जेडीए के अनुसार ध्वस्तीकरण कार्रवाई में हुए खर्च की नियमानुसार संबंधित पक्ष से वसूली की जाएगी। कार्रवाई मुख्य नियंत्रक प्रवर्तन-प्रथम के पर्यवेक्षण में उप नियंत्रक प्रवर्तन-तृतीय, संबंधित प्रवर्तन अधिकारियों तथा जेडीए के राजस्व एवं तकनीकी स्टाफ की मौजूदगी में की गई।

Fact Post News
Author: Fact Post News