जेडीए जोन-10 में ‘एक्शन’ के बाद फिर शुरू हो जाते हैं निर्माण!

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जयपुर।जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के जोन-10 में कथित अवैध निर्माण और अनधिकृत कॉलोनियों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों से सामने आ रही शिकायतों ने जेडीए की प्रवर्तन व्यवस्था, निगरानी और कार्रवाई के बाद की मॉनिटरिंग पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कई जगह जेडीए की ओर से निर्माण रुकवाने या कार्रवाई करने के बावजूद कुछ समय बाद गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी निर्माण को जेडीए नियम विरुद्ध मानकर रुकवाता है तो उसके बाद उसी स्थान पर दोबारा निर्माण शुरू कैसे हो जाता है? क्या कार्रवाई के बाद मौके की नियमित निगरानी नहीं होती या फिर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है?

विजयपुरा में कथित अवैध दुकानों का निर्माण

जोन-10 के विजयपुरा क्षेत्र में दुकानों के निर्माण को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि यहां नियमों के विपरीत निर्माण गतिविधियां संचालित की जा रही हैं और अभी तक जेडीए की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण गतिविधियां यदि जेडीए के निर्धारित भवन नियमों, भू-उपयोग या स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप नहीं हैं तो विभाग को मौके का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि निर्माण स्वीकृत है तो जेडीए को यह भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित निर्माण के लिए किस प्रकार की अनुमति अथवा स्वीकृति जारी की गई है।

मुख्य आगरा रोड पर कांजी नगर में पहले रुकवाया काम, अब फिर निर्माण

जोन-10 में मुख्य आगरा रोड स्थित कांजी नगर का मामला भी चर्चा में है। शिकायत के मुताबिक यहां दुकानों के निर्माण का काम पहले जेडीए की ओर से रुकवाया गया था। कार्रवाई के बाद कुछ समय तक निर्माण गतिविधियां थमी रहीं, लेकिन अब आरोप है कि मौके पर फिर से निर्माण शुरू कर दिया गया है।

यह स्थिति जेडीए की प्रवर्तन कार्रवाई की प्रभावशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि किसी स्थल पर निर्माण नियम विरुद्ध पाया गया था तो केवल काम रुकवाने के बाद उसे दोबारा शुरू होने से रोकना भी विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जेडीए की टीम ने कार्रवाई के बाद मौके की निगरानी कितनी बार की?

जयसिंहपुरा में ध्वस्त कॉलोनी ‘विद्या विहार’ में फिर निर्माण की शिकायत

जयसिंहपुरा क्षेत्र में ‘विद्या विहार’ नाम से विकसित की गई कॉलोनी पर पूर्व में जेडीए द्वारा कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कॉलोनी में ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बावजूद अब फिर से निर्माण गतिविधियां संचालित होने लगी हैं।

यदि यह स्थिति मौके पर सही पाई जाती है तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि पूर्व में ध्वस्त की गई कॉलोनी में दोबारा निर्माण की अनुमति किस स्तर पर मिली और जेडीए की प्रवर्तन टीम ने इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए?

स्थानीय लोगों के मुताबिक ऐसे मामलों में केवल एक बार कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। कार्रवाई के बाद संबंधित जमीन पर दोबारा प्लॉटिंग, निर्माण या अन्य गतिविधि शुरू न हो, इसके लिए लगातार निगरानी और जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।

जमा रामगढ़ में ‘विवेक विहार’ के नाम से कॉलोनी विकसित करने का आरोप

जोन-10 के जमा रामगढ़ क्षेत्र में भी एक नया मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार यहां ‘विवेक विहार’ नाम से कॉलोनी विकसित किए जाने की तैयारी की जा रही है। आरोप है कि जमीन पर प्लॉट विकसित करने और निर्माण गतिविधियों से जुड़ा काम किया जा रहा है।

यदि कृषि भूमि का उपयोग बिना सक्षम अनुमति के आवासीय कॉलोनी के रूप में किया जा रहा है तो यह जेडीए के लिए गंभीर मामला हो सकता है। ऐसे में मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाना जरूरी है कि भूमि का वर्तमान भू-उपयोग क्या है, कॉलोनी के लिए कोई स्वीकृति है या नहीं और वहां विकास कार्य किसकी अनुमति से किए जा रहे हैं।

‘पहले कार्रवाई, फिर वही निर्माण’ की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता

जोन-10 से जुड़े इन मामलों में सबसे अहम बात यह है कि शिकायतें केवल एक स्थान तक सीमित नहीं हैं। विजयपुरा, कांजी नगर, जयसिंहपुरा और जमा रामगढ़—अलग-अलग इलाकों से निर्माण और कॉलोनी विकसित करने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
कुछ मामलों में जेडीए की ओर से कार्रवाई की जाती है, लेकिन कार्रवाई के बाद प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण निर्माण गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और मौके के निरीक्षण से ही हो सकती है।


शिकायतों की जांच और मौके की कार्रवाई जरूरी

जेडीए के प्रवर्तन तंत्र के लिए ये मामले इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अनधिकृत निर्माण या अवैध कॉलोनी विकसित होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय शुरुआती स्तर पर ही निर्माण रोकना अधिक प्रभावी माना जाता है। यदि किसी स्थान पर निर्माण रुकवाने के बावजूद दोबारा गतिविधियां शुरू होने की शिकायत सही पाई जाती है तो विभाग को कार्रवाई के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित स्थल पर दोबारा निर्माण न हो।

अब निगाहें जेडीए जोन-10 के अधिकारियों पर हैं कि इन सभी शिकायतों का मौके पर सत्यापन कब होता है, क्या कार्रवाई की जाती है और कार्रवाई के बाद उसकी मॉनिटरिंग कैसे सुनिश्चित की जाती है।

सवाल सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, कार्रवाई के बाद भी निर्माण दोबारा शुरू होने का है। यदि नियमों के विरुद्ध हो रहे निर्माणों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में यही गतिविधियां बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं।

Fact Post News
Author: Fact Post News